सत्ता से 7 साल दूर कांग्रेस अब करेगी वापसी की कोशिश, 2027 चुनाव के लिए बिछाई रणनीति की बिसात

उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी सियासी तैयारियां तेज कर दी हैं। लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रही पार्टी अब चुनावी मैदान में मजबूत वापसी के लिए संगठन को धार देने, जनता के बीच पहुंच बढ़ाने और केंद्रीय नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी के जरिए नई रणनीति तैयार कर रही है।

कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही राज्यभर में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। जिला स्तर पर परिवर्तन यात्राएं निकाली जा रही हैं, जबकि प्रदेश मुख्यालय में लगातार बैठकों के जरिए चुनावी रोडमैप तैयार किया जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और जनता से सीधे संवाद स्थापित करना है।

कांग्रेस इस बार चुनावी अभियान को केवल प्रदेश नेताओं तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी हाईकमान ने उत्तराखंड पर विशेष फोकस करते हुए राष्ट्रीय नेताओं के दौरे की योजना बनाई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित देहरादून दौरे को अभियान की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य केंद्रीय नेताओं के उत्तराखंड दौरे प्रस्तावित हैं। पार्टी की कोशिश है कि राष्ट्रीय नेता सीधे जनता के बीच जाकर राज्य के प्रमुख मुद्दों को समझें और उन्हें चुनावी अभियान का हिस्सा बनाएं।

कांग्रेस युवाओं को अपने अभियान के केंद्र में रखने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में विवाद, पलायन और रोजगार के सीमित अवसर राज्य के बड़े मुद्दे हैं।

राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम में युवाओं और छात्रों से संवाद की योजना बनाई गई है। इसके जरिए कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेगी।

आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए 18 जुलाई को प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें नेताओं के दौरे, जनसंपर्क अभियान और संगठन की आगामी गतिविधियों की रूपरेखा तय की जाएगी।

पार्टी की योजना है कि अभियान को केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित न रखते हुए पर्वतीय जिलों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाया जाए।

कांग्रेस नेतृत्व संगठन के भीतर एकजुटता को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश के नेताओं के साथ बैठक कर साफ संदेश दिया कि चुनाव जीतने के लिए सभी नेताओं को मिलकर काम करना होगा।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आंतरिक मतभेदों को दूर कर ही भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश की जा सकती है।

कांग्रेस इस बार उम्मीदवार चयन में भी बदलाव की तैयारी में है। पार्टी क्षेत्र में सक्रिय नेताओं, मजबूत जनाधार वाले चेहरों और चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की योजना बना रही है।

संभावित प्रत्याशियों की क्षेत्र में सक्रियता, संगठन से जुड़ाव और जनता के बीच छवि का आकलन करने के बाद टिकट देने की रणनीति बनाई जा रही है।

कांग्रेस ने आगामी चुनाव के लिए बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाएं, कानून व्यवस्था, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं को प्रमुख मुद्दे के रूप में चिन्हित किया है।

पार्टी का प्रयास रहेगा कि चुनावी चर्चा को आम जनता की समस्याओं के इर्द-गिर्द रखा जाए और सरकार को इन्हीं मुद्दों पर घेरा जाए।

कांग्रेस इस बार घोषणापत्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आम लोगों और युवाओं से सुझाव लेने की तैयारी कर रही है। पार्टी की योजना है कि विभिन्न वर्गों की समस्याओं और अपेक्षाओं को शामिल कर ऐसा घोषणापत्र तैयार किया जाए जो राज्य की जरूरतों को दर्शाए।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कांग्रेस के सामने चुनौती केवल भाजपा से मुकाबला करना नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत कर कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना भी है। यही वजह है कि पार्टी चुनाव से काफी पहले ही अपनी रणनीति और अभियान को सक्रिय करने में जुट गई है।

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